संन्यास एक अवस्था है कोई परम्परा नहीं

अन्याय कोई भी करे, अत्याचार कोई भी करे उसके विरुद्ध होना ही सनातन धर्म है | जो अन्यायी व अत्याचारियों के समर्थन में होता है, वह अधर्मी है | जो दूसरों पर अत्याचार करता है, जो दूसरों को चैन से नहीं जीने देना वह अत्याचारी है अधर्मी है और उसके विरुद्ध होना सनातन धर्म है | Continue Reading →

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आधुनिक शिक्षा, समाज व न्यायिक व्यवस्था ही अपराध की जननी

आधुनिकता की दौड़ में दौड़ने वालो, थोड़ा वापस मुड़कर देख लो | अपनी ही मौलिकता को खो चुके हो, प्रकृति से कितने दूर हो चुके हो | और प्रकृति से जितने दूर होते जाओगे, उतना ही अपराध, और उत्पात में घिरा पाओगे Continue Reading →

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इंसान को इंसान ही रहने दें

आइन्स्टीन, मार्क ट्वेन, स्टीव जॉब्स, ओशो का कमरा और टेबल बहुत ही अस्तव्यस्त रहता था और यहाँ तक कि जुकरबर्ग का टेबल भी | लेकिन वे बाहर से चाहे कितने ही अस्तव्यस्त थे उन्होंने बहुत ही व्यवस्थित अविष्कार व दिशा निर्देश दिए | Continue Reading →

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अच्छों को महत्व नहीं दिया जाएगा और बुरे लोगों को गले लगाया जाएगा

आप लाख दुहाई देते रहें कि हमारी धार्मिक किताबें अन्याय व अत्याचार के विरुद्ध हैं, हमारी आसमानी किताबें सत्य, न्याय और इमानदारी की शिक्षा देती है….सब व्यर्थ | क्योंकि बच्चे समझ चुके होते हैं कि आप लोग यानि उन बच्चों के माता-पिता और बुजुर्गों का समाज सदियों से झूठ बोलता आया है और बोलता रहेगा | Continue Reading →

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