संन्यास एक अवस्था है कोई परम्परा नहीं

अन्याय कोई भी करे, अत्याचार कोई भी करे उसके विरुद्ध होना ही सनातन धर्म है | जो अन्यायी व अत्याचारियों के समर्थन में होता है, वह अधर्मी है | जो दूसरों पर अत्याचार करता है, जो दूसरों को चैन से नहीं जीने देना वह अत्याचारी है अधर्मी है और उसके विरुद्ध होना सनातन धर्म है | Continue Reading →

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इंसान को इंसान ही रहने दें

आइन्स्टीन, मार्क ट्वेन, स्टीव जॉब्स, ओशो का कमरा और टेबल बहुत ही अस्तव्यस्त रहता था और यहाँ तक कि जुकरबर्ग का टेबल भी | लेकिन वे बाहर से चाहे कितने ही अस्तव्यस्त थे उन्होंने बहुत ही व्यवस्थित अविष्कार व दिशा निर्देश दिए | Continue Reading →

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धर्म और मजहब

घर से बहिष्कार किया जा सकता है किसी का | गाँव से बहिष्कार किया जा सकता है किसी का | देश से बहिष्कार किया जा सकता है किसी का | जाति से बहिष्कार किया जा सकता है किसी का | मजहब, पंथ, सम्प्रदाय, रिलीजन से बहिष्कार किया जा सकता है किसी का | केवल धर्म से बहिष्कार नहीं कर सकते, क्योंकि सनातन है, धर्म मानव-निर्मित नहीं | यही कारण है कि न रावण का बहिष्कार हो पाया धर्म से और न ही हिटलर या मुसोलिनी का और न ही गौ-आतंकी या दहशतगर्दों का बहिष्कार हो पाता है धर्म से | जो भी जिस धर्म के अंतर्गत आता है, उसी धर्म का मान-सम्मान बढाता है या कलंकित करता है | इसी लिए उसी धर्मानुसार ही उसका अंतिम-संस्कार किया जाता है | तो धर्म और मजहब का अंतर जब Continue Reading →

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