संन्यास एक अवस्था है कोई परम्परा नहीं

अन्याय कोई भी करे, अत्याचार कोई भी करे उसके विरुद्ध होना ही सनातन धर्म है | जो अन्यायी व अत्याचारियों के समर्थन में होता है, वह अधर्मी है | जो दूसरों पर अत्याचार करता है, जो दूसरों को चैन से नहीं जीने देना वह अत्याचारी है अधर्मी है और उसके विरुद्ध होना सनातन धर्म है | Continue Reading →

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