सनातन धर्म और किताबी धर्मों (Religions) में अंतर

यह ध्यान रहे चार अच्छे लोगों या वास्तविक संतों के आधार पर आप पूरे साधू-समाज को अच्छा नहीं कह सकते | क्योंकि चार बुरे लोगों या संतों के कारण पूरा साधू समाज बुरा नहीं हो जाता

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जब इस तस्वीर का इतिहास लिखा जायेगा

यह एक ऐतिहासिक तस्वीर इसलिए है क्योंकि इसमें भारत का वह वैभव दिख रहा है जो विपक्षियों को अगले कई जन्मों तक नहीं दिखाई देगा | आज से हज़ार-पाँच सौ वर्ष बाद जब इस तस्वीर का इतिहास लिखा जायेगा तो बताया जाएगा कि भारत के वैभव व समृद्धि के विषय में सुनकर विश्वविजेता अमेरिका की राजकुमारी भारत आयीं थीं

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कयामत के दिन तुरही बजेगी और मुर्दा जी उठेगा

जब भी कभी उस उपरी अदालत की कल्पना करता हूँ, जहाँ जज बैठकर न्याय करते हैं, स्वर्ग नरक आदि पर निर्णय देते हैं…तो मुझे बिलकुल वैसा ही दृश्य नजर आता है जैसे फिल्म-फेस्टिवल पर देखने को मिलता है

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जो आदमी संन्यासी हो जाता है, क्या वह बुजदिल होता है ?

सामान्यतः समाज केवल नेता या ताकत को देखकर सही या गलत कहता है | लेकिन यदि संन्यासी भी नेता या ताकत के सामने नतमस्तक हो जायेगा आम प्रजा की तरह तो वह संन्यासी कहलाने के अधिकार से वंचित हो जाएगा | वह फिर राजाओं, मंत्रियों व बाहुबलियों द्वारा पाले गये पालतू साधू-संतों की अवस्था को ही प्राप्त होगा, संन्यास की उच्चतम अवस्था को नहीं |

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इन्साफ ईश्वर करेगा या इंसान करेगा ?

आप सभी के आसमानी, ईश्वरीय और धार्मिक ग्रन्थ व संविधान यही कहते हैं कि खुदा/ईश्वर स्वयं न्याय करता है | लेकिन वह न्याय करेगा कयामत के दिन | तब तक तो वह अन्यायी, अत्यचारी का विरोध करने तक की हिम्मत नहीं रखता | ऐसे में स्वाभाविक है कि न्याय के लिए किसी योग्य व्यक्ति को चुना जाना चाहिए

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