“भगवान का साम्राज्य इंसान के भीतर ही है”

Print Friendly, PDF & Email

सिपाहियो! अपने आप को धोखेबाजों के हाथों मत सौंपो – जो लोग तुमसे नफरत करते हैं – तुम्हें गुलाम बनाकर रखते हैं – जो खुद तुम्हारी ज़िंदगी के फैसले करते हैं – तुम्हें बताते हैं कि तुम्हें क्या करना है – क्या सोचना है और क्या महसूस करना है – जो तुम्हें खिलाते हैं – तुम्हारे साथ पालतू जानवरों और तोप के चारे जैसा तरह व्यवहार करते हैं। Continue Reading →

356 total views, 3 views today

[read_more id="1" more="Read more" less="Read less"]Read more hidden text[/read_more]
Share this post

वर्ण के सत्य में उंच-नीच का भेद नहीं, व्यक्तित्व का भेद था

Print Friendly, PDF & Email

जितना मनुष्य के संबंध में वैज्ञानिक चिंतन बढ़ेगा आने वाली सदी में, वर्ण की व्यवस्था वापस लौट आएगी। हिंदुओं की वर्ण की व्यवस्था नहीं लौटेगी। वह तो गई, वह मर गई। वर्ण की व्यवस्था लौट आएगी और अब और ज्यादा वैज्ञानिक होकर लौटेगी। Continue Reading →

349 total views, 3 views today

[read_more id="1" more="Read more" less="Read less"]Read more hidden text[/read_more]
Share this post

ईश्वर है या नहीं ?

Print Friendly, PDF & Email

एक किताब, दो किताब, हजार किताब में लिखा हो कि है, कि बेकार है…..जब तक कि भीतर से न उठे कि है, तब तक कोई उत्तर दूसरे का काम नहीं दे सकता। ईश्वर के संबंध में उधारी न चलेगी। और सब संबंध में उधारी चल सकती है, ईश्वर के संबंध में उधारी नहीं चल सकती। Continue Reading →

365 total views, 3 views today

[read_more id="1" more="Read more" less="Read less"]Read more hidden text[/read_more]
Share this post

गुरु और शिक्षक में अंतर

Print Friendly, PDF & Email

गुरु के पास जाने के बाद हमारे अतीत में और हमारे भविष्य में एक गैप, एक अंतराल हो जाता है। लौट के आप देखेंगे तो अपनी कथा ऐसी लगेगी, किसी और की कहांनी है। अगर गुरु के पास गये। अगर शिक्षक के पास गये तो अपनी कथा अपनी ही कथा है। बीच में कोई खाली जगह नहीं है जहां चीजें टूट गयी हों, जहां आपका पुराना रूप बिखर गया हो और नये का जन्म हुआ हो। Continue Reading →

589 total views, 2 views today

[read_more id="1" more="Read more" less="Read less"]Read more hidden text[/read_more]
Share this post