वास्तु शास्त्र का महत्व

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मैंने पाया कि आश्रम में अधिकांश लोग बीमार ही रहते हैं और आर्थिक आभाव में यह आश्रम हमेशा रहा | कोई मंदिर में न दान देता है और नहीं कोई चढ़ावा चढ़ाता है | आश्रम प्रमुख उन्हें ही चुना जाता है, जिनके शिष्य आर्थिक रूप से समृद्ध हों, इसलिए आश्रम प्रमुख सुखी रहते हैं, घूमते फिरते हैं Continue Reading →

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क्या ऐसा सम्भव है कि एक ब्राह्मण अपने बेटे को शूद्र बन जाने देगा ?

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जातिवाद कुछ वैसा ही है जैसे किसी का बाप डॉक्टर है तो उसकी औलादें अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखना शुरू कर दें, चाहे वे कहीं चपरासी की नौकरी कर रहा हो…लेकिन नाम के आगे डॉक्टर ही लगाएगा Continue Reading →

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क्या दैत्य, दानव, शैतान, जिन्न आदि वास्तव में होते हैं ?

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शैतान, दैत्य, जिन्न, दानव आदि कभी मिटे ही नहीं और न ही कभी मिटेंगे | बस ये रूप बदल बदलकर आते रहेंगे और निर्दोषों, मासूमों पर अत्याचार करते रहेंगे | कभी देवासुर संग्राम के रूप में तो कभी ईराक, सीरिया युद्ध के रूप में, तो कभी नक्सलियों से युध्द के रूप में तो कभी महाभारत या रामायण युद्ध के रूप में… Continue Reading →

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सनातन धर्म और किताबी धर्मों (Religions) में अंतर

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यह ध्यान रहे चार अच्छे लोगों या वास्तविक संतों के आधार पर आप पूरे साधू-समाज को अच्छा नहीं कह सकते | क्योंकि चार बुरे लोगों या संतों के कारण पूरा साधू समाज बुरा नहीं हो जाता Continue Reading →

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