मैं आज तक बड़ा नहीं हो पाया धार्मिकों की नजर में

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मैं फिर से स्पष्ट कर दूं कि सुधरने का अब कोई इरादा नहीं है मेरा | क्योंकि जिसे आप लोग सुधरना मानते हैं, उसे मैं भेड़चाल मानता हूँ | मैं आप लोगों की तरह दोगला नहीं हो सकता….. Continue Reading →

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क्या धर्म ग्रंथों का कोई लाभ है ?

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ये धार्मिक ग्रन्थ केवल अच्छे व्यक्ति को अच्छा बना सकते हैं, भले व्यक्ति को ही भला बना सकते हैं, प्रेम से भरे हुए व्यक्ति को ही प्रेम सिखा सकते हैं….लेकिन विपरीत मानसिकता के लोगों को सही राह पर नहीं ला सकते | Continue Reading →

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क्या आप ऐश्वर्य, स्वर्ग, जन्नत आदि के अभिलाषी नहीं हैं ?

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बहुत आश्चर्य होता है मुझे ऐसे लोगों से मिलकर, जिनके आदर्श तो त्यागी महात्मा होते हैं, लेकिन खुद दौड़ रहे होते हैं धन के पीछे | सारा ध्यान ही धन पर केन्द्रित होता है, सेक्स पर केन्द्रित रहता है | कई ऐसे भी साधू-संत देखे हैं मैंने जो दिन रात यही देखते रहते हैं कि कौन किस लड़की के साथ घूम रहा है, किसका चक्कर किसके साथ चल रहा है….. Continue Reading →

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क्या आप धार्मिक हैं ?

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धर्म निभाते समय किसी पर एहसान करने का भाव नहीं होता और न ही उसे करने के बाद किसी प्रकार की थकान, शिकायत या ग्लानी का भाव होता है | जबकि कर्त्तव्य वह होता है, जिसमें बाध्यता है, विवशता है, दबाव है | कर्त्तव्य निभाते समय आपको अपनी भावनाओं, इच्छाओं, दुख, पीड़ा को भी मारना पड़े तो मारना पड़ेगा Continue Reading →

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