भय के कारण कितनी देर सम्‍हलकर चलोगे ?

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जब परेशानी में पड़ते हैं तो ईश्वर विशेष रूप से याद आने लगते हैं. गरीबों के प्रति दया-करूणा जाग जाती है. विनीत हो जाते हैं पर वह सब बनावटी ही होता है. समय फिरते ही नजरें फिर जाती हैं. Continue Reading →

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‘गुरु करता क्या है? आखिर गुरु का कृत्य क्या है?’

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एक गुरु ने अपने शिष्य को तुलाधर वैश्य के पास ज्ञान लेने भेजा। शिष्य ने कहां, ‘आप ब्राह्मण हैं। आप महापण्डित हैं और एक बनिये के पास मुझे भेज रहे हैं ज्ञान लेने?’ तो उसके गुरु ने कहां, ‘ज्ञान न तो ब्राह्मण को देखता है, न वैश्य को देखता है, न क्षत्रिय को देखता है : जिसकी पात्रता होती है, उसका पात्र अमृत से भर जाता है। तो तू तुलाधर के पास जा।’ जाना पड़ा; गुरु ने कहां था शिष्य को। तो तुलाधर के पास बैठा। उसे कुछ समझ में न आया कि क्या इस आदमी में…! तुलाधर उसका नाम ही हो गया था कि दिनभर वह तराजू लेकर तौलता रहता, तौलता रहता! उसने पूछा कि ‘तुम्हारा राज क्या है?’ उसने कहां कि ‘मैं डांडी नहीं मारता। इतना ही मेरा राज है। चोर नहीं हूं। समभाव से तौलता हूं—समता, समत्व, Continue Reading →

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आप चाहते क्या हैं वह आपको पता होना चाहिए

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जो व्यक्ति यह कहता है कि वह सभी के साथ मिलजुलकर रहता है तो तय है वह खुश होगा क्योंकि उसका उद्देश्य समाज के दकियानूसी विचारों को प्रभावित नहीं कर रहे | लेकिन यदि उसे कुछ नवीन करना है तो समाज के सभी लोग उससे खुश नहीं रह सकते | उसे विरोध सहना ही होगा | Continue Reading →

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चक्कर-भर्ती सम्राट का स्वर्णयुग

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कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है | मोतीचूर नामक चक्करभर्ती सम्राट राज्य करता था किसी देश में | वह बहुत ही आधुनिक विचारों का था और नई खोज करने के लिए विश्वभ्रमण करता रहता था | उसका राजकाज उसके मंत्री और उनके परममित्र धन्नासेठ चलाया करते थे | राजा का बस एक ही शौक था, देशविदेश घूमना, महंगे कपड़े पहनना | एक दिन जब राजा स्वदेश लौटा विश्वभ्रमण से तो दरबारियों ने सोचा कि राजा को विदेशी नजर लग गयी होगी, इसलिए अखण्ड रामायण पाठ रखवाया जाए | पंडितजी आयेंगे तो भविष्य भी बता देंगे और राजा भी तब तक देश में ही रुके रहेंगे | तो अखण्ड रामायण पाठ रखवाया गया और राजा भी डिज़ाईनर ड्रेस में सजधज कर अपने आसन पर विराजमान हो गये | रामायण पाठ का उनपर इतना असर हुआ कि पूछ बैठे दरबारियों से, “क्या Continue Reading →

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