तमाशा पकौड़ों का

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मैंने साउथ दिल्ली के एक चाट पकोड़े वाले से पूछा था कि वह दिन में कितना कम लेता है, तो उसने कहा था कि लगभग दस हज़ार रूपये रोजाना | उस समय मैं पन्द्रह हज़ार रूपये महीने पर काम करता था किसी प्रोडक्शन हाउस में | Continue Reading →

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हम क्यूँ भूल जाते हैं कि कभी तमाशा हम भी हो सकते है ?

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भीड़ तो फोटो और वीडियो बनाने में जुटी थी, कोई उन्हें आगे आने ही नहीं दे रहा था जैसे तमाशा लगा हो। जब उन्होंने बताया कि वे डॉक्टर है और मुआयना करना चाहती हैं तब कहीं जाकर बात बनी Continue Reading →

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खुदा सब देख रहा है !

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खुद पर कोई अन्याय हो, तब तुरंत विरोध के लिए खड़े हो जाओ क्योंकि खुदा का कोई भरोसा नहीं कब न्याय करे Continue Reading →

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अंधभक्ति और अंधश्रृद्धा का जीवन्त उदहारण

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कभी कभी सोचता हूँ, दुमछल्ला होना हिमालय की चोटी पर एक पैर पर खड़े होकर, एक लाख वर्षों तक तपस्या करने से भी कठिन है | बहुत ही जीवट होते हैं वे लोग जो नेताओं के दुमछल्ले बनते हैं | और यही कारण है कि नेता लोग अकड़ में रहते हैं…रहना भी चाहिए…उनको दुनिया के सबसे निराले भक्त जो मिले हैं !!! Continue Reading →

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