सच्चा संन्यासी

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फिर मेरी समझ में आज तक नहीं आया कि ये जो भगवाधारी सांसद हैं क्या वे संन्यासी नहीं कहते स्वयं को ? क्या उनको अधिकारिक प्रमाणपत्र नहीं मिला हुआ है साधू-समाज से संन्यासी होने का ? फिर उनसे इन लोगों को आपत्ति क्यों नहीं ? Continue Reading →

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घातक हो सकता है त्राटक

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जब तक आप न जानें कि आप क्या है, आप रूपांतरित नहीं हो सकते क्योंकि कोई भी रूपांतरण केवल इसी नग्न वास्तविकता में संभव है। यह नग्न वास्तविकता प्रसुप्त बीज है किसी भी रूपांतरण के लिए। कोई प्रवंचना रूपांतरित नहीं हो सकती Continue Reading →

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साक्षी भाव का ध्यान

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“…लेकिन मैं ठीक होना ही नहीं चाहता तो कोई भी विधि काम नहीं करेगी | मैं कई ऐसी चीजें जानता हूँ जिनसे में अपना उपचार कर सकता हूँ, लेकिन कुछ नहीं कर रहा हूँ |  कारण है कि मैं इस समय सभी प्रकार के जिम्मेदारियों से मुक्त हूँ | न मुझे किसी से मिलना है और न ही कोई मुझसे मिलने आने वाला है | तो यहाँ मैं अपने ऊपर ही प्रयोग कर सकता हूँ | मैं जान सकता हूँ वे बहुत सी बातें जो शायद पहले यहाँ किसी ने जानने की कोशिश नहीं की |  ओशो ने कहा था कि जब दुःख तुम्हें घेर लें, उदासी के गहरे अंधेरों में सामने लगो तब तुम साक्षी हो जाओ | भागो मत, बचने के उपाय मत करो, उनका स्वागत करो, एक आत्मीय मित्र की तरह उन्हें गले लगाओ | आपका अपना Continue Reading →

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विष्णु की तरह वैभव शाली होना ही ईश्वर की प्राप्ति है

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मोह-माया सब मिथ्या है, जगत मिथ्या है…. आदि इत्यादि लगभग हर साधू-संत, ब्रह्मज्ञानियों से अक्सर सुनने को मिलता है | और आप देखेंगे कि इनमे से अधिकांश सारे ऐशो आराम भोग रहे होते हैं | हाँ कुछ लोग हैं जो भांगधतूरे के नशे में मस्त नंगे या लंगोट डाले घूमते पाए जाते हैं | कुछ साधू संत ऐसे भी हैं जो हिमालय में या किसी बियाबान जंगल में ईश्वर को खोज रहे हैं | लेकिन जैसे ही कोई कहता है वह ईश्वर को खोज रहा है मोह-माया को त्याग कर, तो लोग उसे महान समझ लेते हैं | जबकि वह ईश्वर के रूप में ऐश्वर्य को खोज रहा होता है | बचपन से यह धारणा बैठा दी गयी होती है कि यह जगत मिथ्या है और जो कुछ यहाँ है उससे अधिक सुख व ऐश ईश्वर के पास ही मिल Continue Reading →

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