आधुनिक रक्तबीज

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अक्सर फेसबुक पर देखता हूँ कि आये दिन कोई न कोई फेसबुक छोड़ने की बात करता है या छोड़ देता है | मैंने भी छोड़ दिया था एक बार एक दो महीने के लिए | कई विद्वानों का मानना है कि फेसबुक में लिखकर अपना समय ही बरबाद करते हैं लोग होना जाना कुछ नहीं |

आज एक महिला मित्र ने फोन पर जानकारी दी कि उसने फेसबुक छोड़ दिया क्योंकि लोग गाली-गलौज बहुत करते हैं, कितने ही शांति से समझाने का प्रयत्न करो, लेकिन उनकी समझ में कुछ नहीं आता |

तो कुछ लोग फेसबुक इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि लाइक/कॉमेंट्स नहीं मिलते | कुछ लोग इसलिए छोड़ देते क्योंकि कुछ लिखना नहीं आता और केवल-देवी देवताओं के तस्वीरें पोस्ट करके एक लाइन लिख देते हैं, “इसे देखते ही लाइक करें कुछ अच्छा होगा !” कुछ लोग समाज या दुनिया को बदलना चाहते हैं इसलिए लिखते हैं, लेकिन दुनिया बदलती नहीं इसलिए छोड़ देते हैं | कुछ लोग गाली-गलौज और उपद्रवों से तंग आकर छोड़ देते हैं |
मैंने छोड़ा था क्योंकि मैं भी गाली-गलौज से तंग आ गया था | लेकिन फिर समझ में आया कि इसका उपाय है कॉमेंट्स आप्शन को फ्रेंड्स ओनली कर देना | क्योंकि गाली-गलौज करने वालों की संख्या बहुत अधिक है और हर किसी को ब्लॉक करते रहना बिलकुल वैसा ही है, जैसे मच्छर पकड़ कर उसके मुँह में ज़हर की बूँद देकर मारना | इससे बेहतर है कि मच्छरदानी लगा लें और फेसबुक ने मच्छरदानी दी हुई हैं फ्रेंड्स ओनली कॉमेंट्स आप्शन के रूप में | इसे एक्टिवेट करने के बाद कुछ विशेष नहीं करना होता, केवल उपद्रवियों को मित्र सूची से बाहर करना होता है | और इस तरह धीरे-धीरे करके आपके पेज में शान्ति का वातावरण बन जाता है… जैसे मेरे पेज में बना हुआ है… फिर लोग कमेन्ट तो क्या, लाइक भी कई दिनों तक सोचने के बाद करते हैं | कई लोग अनफ़ॉलो कर देते हैं…लेकिन कुलमिलाकर शांति का वातावरण रहता है |

दूसरी बात यह कि उपद्रवी और कोई नहीं, वही रक्तबीज हैं जिनका संहार करने के लिए माँ काली, माँ दुर्गा प्रकट हुईं थीं…लेकिन रक्तबीज समाप्त नहीं हुए…वे हमेशा रहेंगे ही ही और तब तक रहेंगे जब तक शरीफ लोग इस दुनिया में हैं, जब तक ईश्वर की उपासना होती रहेगी….ये जो नौ देवियों को पूजने की परम्परा है, उसे ढोने की जगह समझने का प्रयास करें | अपने भीतर इतनी शक्ति उत्पन्न करें कि आप इनका सामना कर पायें… चाहे मच्छरदानी लगाकर ही सही, चाहे ऑल आउट या कछुआ जलाकर ही सही | लेकिन अपना घर छोड़कर मत भागिए, क्योंकि ऐसा करने पर विजयी रक्तबीज ही होंगे और माँ दुर्गा या काली पराजित होंगी |

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जो समाज व दुनिया को बदलना चाहते हैं और रक्तबीजों के गाली-गलौज से तंग आकर फेसबुक छोड़ देते हैं, उन्हें यह समझना दुनिया को न तो गौतम बुद्ध बदल पाए, न महावीर बदल पाए, न विवेकान्द बदल पाए, न नानक, न कबीर…..तो आप या मैं क्या खाक बदल देंगे !!! इसलिए अपनी सीमाएं तय कीजिये और उसपर उन लोगों से चर्चा कीजिये जो आपको समझते हैं या जानते हैं | बाकी लोगों के लिए ब्लॉग बना लीजिये, फेसबुक पेज बना लीजिये…. और फिर जिनको उल्टियाँ करने की बिमारी होगी, गाली-गलौज की बिमारी होगी, वे लोग आपके पेज में जाकर उपद्रव करेंगे… लेकिन आपका व्यक्तिगत आईडी बिलकुल साफ-सुथरा रहेगा |

आप सभी को नवमी व काली पूजा की अग्रिम शुभकामनाएँ | ~विशुद्ध चैतन्य

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