सनातन धर्म और आधुनिक इस्लाम व हिंदुत्व

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मेरी समझ में नहीं आता कि इतनी बार मैंने धर्म की व्याख्या की, फिर भी लोग पूछते हैं की हिन्दू धर्म और सनातन धर्म में क्या फर्क है ???

आज दूसरी तरह से समझाता हूँ | केवल हिन्दू और सनातन ही नहीं, इस्लाम भी | क्योंकि मेरे फोलोवार्स में 80% मुस्लिम हैं |

हिन्दू धर्म:

हिन्दू धर्म उसे कहते हैं जो कहते हैं गर्व से कहो हम दिमाग से पैदल हैं अक्ल के अंधे हैं क्योंकि हम मोदीभक्त हैं | इनको हिन्दू धर्मग्रंथों का बहुत ही गहरा ज्ञान होता है और सभी ग्रंथों के नाम कंठस्थ होते हैं | ये केवल जिल्द यानि कवर देखकर बता देंगे कि कौन सा धार्मिक ग्रन्थ है और किसने लिखा है | यह और बात है कि भीतर क्या लिखा है उसका इनको कोई ज्ञान नहीं होता | क्योंकि ये लोग धार्मिक ग्रंथों की इतनी इज्ज़त करते हैं कि मंदिरों में सजा कर रखते हैं और रोज जाकर अगरबत्ती दिखाकर किताब के आस पास सात चक्कर लगाकर ही अन्न ग्रहण करते हैं | किताबें खोल्क्कर देखना धर्मग्रंथों का अपमान समझते हैं |

कई हिन्दू बहुत विद्वान होते हैं और सारे धर्मग्रन्थ उन्हें कंठस्थ होते हैं | और चूँकि कट्टर हिन्दू होते हैं, इसीलिए किताबी बातों को किताबी ही रहने देते हैं | क्योंकि उसमें बताई सभी बातें ईश्वरीय हैं और केवल ईश्वर ही उसे व्यव्हार म लाते हैं, इंसान लायेंगे व्यव्हार में तो लोग उन्हें ईश्वर समझने लगेंगे | और यही कारण है कि हिन्दुओं को किताबी बातों के विरुद्ध आचरण करते ही पायेंगे आप |

इनके पास सिवाय पूर्वजों की किस्से कहानी सुनाने, उनके नाम पर लड़ने मरने के और कुछ है ही नहीं | धार्मिक ग्रन्थ में लिखा है न अन्याय व अत्याचार सहो और न ही किसी पर होने दो | अत्याचार को सहने वाला, देखने वाला और करने वाला तीनों ही अपराधी हैं | आप कभी नहीं देखेंगे कि हिन्दू कभी भी अत्याचारियों, भूमाफियों, भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध संगठित होते हों | अब चूँकि ईश्वरीय वाणी है तो यह काम केवल ईश्वर को ही करना है जब वह अवतार लेगा | तब तक हिन्दू लोग धर्म की रक्षा करते हैं बेरोजगार, लुच्चों, लफंगों की सेनाएं बनाकर | फिर ये धर्म रक्षक पार्कों में घूमते हैं और जोड़ों को खोजते हैं ताकि धर्म की रक्षा की जा सके | ये फिर गाय ले जाते मुसलमान को खोजते हैं या फिर मुसलमानों के घरों में रखे फ्रिज सूंघते फिरते हैं धर्म की रक्षा के लिए | लेकिन ये कभी भी दहेज़ के विरुद्ध आवाज नहीं उठाएंगे, ये कभी भी सामाजिक भेदभाव मिटाने का प्रयास नहीं करेंगे, ये कभी भी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिनसे ग्रामीणों का आर्थिक सामाजिक जीवन श्रेष्ठ हो सके | पढ़ लिख भी लिए शहरों में जाकर बैठ जायेंगे, न कि अपने गाँव के उत्थान के लिए कोई योजना बनायेंगे | क्योंकि ये सभी काम ये तो सरकार को करना होता है या फिर अवतारों को |

हिन्दुओं के नेता इनकी स्टोरेज चिप पूरी तरह फॉर्मेट कर देते हैं और केवल एक ही लाइन लूप में फीड कर देते हैं और वह है, "मोदी-मोदी-मोदी-मोदी.......

हिन्दुओं के साथ सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि इतने सारे शास्त्र हैं कि उन्हें पढ़ते पढ़ते उम्र गुजर जाती है और समझ में कुछ नहीं आता | इसीलिए शास्त्रों के ज्ञाता आपको खूब मिल जायेंगे लेकिन वे मात्र रट्टू तोते ही होंगे | उनका आचरण बिलकुल उसे विपरीत मिलेगा जो शास्त्रों में लिखा है |

इस्लाम:

कहा जाता है कि इस्लाम खुदाई धर्म है यानि खुदा ने खुद इस धर्म की स्थापना की | और बाकायदा इस्लाम की पूरी जानकारी क़ुरान नामक धार्मिक ग्रन्थ में लिखवाकर दी ताकि लोगों को इस्लाम समझने में कोई दिक्कत न हो | इस्लाम के अनुयाइयों को मोमिन या मुसलमान कहते हैं | हिन्दू और मुसलमानों में कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं है सिवाय तिलक टोपी के | बाकि दिखने में बिलकुल एक जैसे ही दीखते हैं |

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अब मुसलमानों का इस्लाम भी केवल किताबों में दफन होकर रह गया इसीलिए मुसलमानों को अक्सर कहते सुना जाता है कि इस्लाम को जानना है तो मोमिनो मुसलमानों से मत जानो, क़ुरान पढो | क्योंकि मुसलमानों के आचार-विचार क़ुरान के विपरीत मिलेंगे और लोग उसे ही इस्लाम समझ लेते हैं |

माना जाता है कि पूरे विश्व के मुस्लिम समुदाय में केवल 5% ही क़ुरान को समझ पाते हैं | लेकिन जो समझ पाते हैं क़ुरान को वे भी इस लायक नहीं हो पाते कि कोई महत्वपूर्ण योगदान से पायें मुस्लिम समाज को | क्योंकि 95% मुस्लिम समाज उनको सुनने को तैयार नहीं और यदि वे कुछ ऐसा कहते हैं जो इनकी मान्यताओं के विपरीत होता है तो उसके जान के दुश्मन बन जाते हैं | वे यदि मुस्लिम समाज की आँख खोलने का प्रयास करते हैं तो उन्हें अपनी ही जान बचाकर भागना पड़ता है | तो....

इस्लाम दफन होकर रह गया किताबों में और हिन्दू और मुस्लिमों में अब कोई बुनियादी फर्क नहीं देखने मिलता | मुसलामानों को अधिकार है ईशनिंदा के आरोप में किसी की भी हत्या कर देने का | मुसलमानों को अधिकार है गैर मजहबी लोगों के देवी देवताओं पर घटिया मजाक करने का या उनकी प्रतिमाओं व तस्वीरों का अपमान करने का | लेकिन उनके आराध्यों के खिलाफ कोई कुछ कह दे तो मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं | दिमाग से इतने पैदल होते हैं कि कोई कमी बताओ तो उसे दूर करने का प्रयास करने की बजाय, गलती बताने वाले को ही भला बुरा कहते हैं और ऊपर से नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं कि दूसरों मजहबों की बुराई नहीं करनी चाहिए | यानि ये लोग अपनों के गुनाहों पर पर्दा डालकर शरीफ बना रहना पसंद करते हैं |

इनकी एक विशेषता और होती है और वह यह कि इस्लाम खतरे में है कहकर लाखों की भीड़ इकठी कर लेंगे, पैगम्बर या नबी की कार्टून या फिल्म बनाने पर दुनिया भर में उत्पात मचा देंगे | लेकिन यदि इनके मोहल्ले में कोई पड़ोसी परेशां हो तो कोई पूछने भी नहीं जायेगा | ये लाखों की भीड़ तब गायब हो जाएगी जब इनके ही मोहल्ले में कोई गरीबी से मर रहा हो, किसी किसान को परेशानी हो किसी भूमाफिया से, किसी की बेटी की शादी न हो पा रही हो दहेज़ के कारण...तब ये लाखों की भीड़ गायब हो जाएगी |

इनके लिए क़ुरान आसमानी किताब है और उसमें लिखी सभी बातें आसमानी है | इसलिए व्यव्हार में नहीं लाते क्योंकि यदि आसमानी बातों को व्यव्हार में लायेंगे तो खुदा के नाराज हो जाने का डर होता है | इसलिए लिए ये लोग वही काम करते हैं जो किताबी न हो, जैसे गाली-गलौज करना, दंगे-फसाद करना, किसी के विचार इनके हिसाब से सही न हों तो उसे जान से मारने तक की धमकी देना | जबकि इन्ही की किताब में कहीं लिखा है कि इनके पैगम्बर के ऊपर कोई बुढ़िया कूड़ा फेंक दिया करती थी | लेकिन पैगम्बर उससे कभी नाराज नहीं होते थे | लेकिन एक दिन जब बुढ़िया ने कूड़ा नहीं फेंका तो उसके घर पहुँच गये हाल चाल पता करने | तो ये किताबी आदर्श हैं, मुसलमान हमेशा किताबी आदर्शों से परहेज करते हैं | क्योंकि ये लोग यदि किताबी आदर्शों को व्यव्हार में ले आएंगे तो लोग इन्हें ही पैगम्बर समझने लगेंगे | और अल्लाह ने शायद कहा है कि अब कोई नया पैगम्बर नहीं आएगा....तो ये लोग इस डर से आदर्शों को नहीं अपनाते कि कहीं गलती से वे खुद पैगम्बर न बन जाएँ और खुदा बात झूठी साबित हो जाये | तो ये लोग अपने अल्लाह का बहुत सम्मान करते हैं और उनकी बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं | ये सपने में भी उन्हें झूठा साबित नहीं करना चाहते अच्छा इन्सान बनकर | अधिकांश मुस्लिम तो क़ुरान से इतनी मोहब्बत करते हैं कि खोलकर भी नहीं देखते | बस जिल्द यानि कवर देखकर उसे माथे से लगाते हैं और बोसा लेकर बाइज्जत रख देते हैं |

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इनके साथ भी समस्या वही है जो हिन्दुओं की | इनके भी धार्मिक ग्रन्थ हैं ढेर सारे जो कि कुरान की व्याख्या करते हैं | पहले आपको कुरान रटनी होती है भले समझ में कुछ न आये यानि नौ दस वर्ष की आयु तक क़ुरान रटा दिया जाता है | लेकिन उसे समझने में पूरी उम्र निकल जाती है और समझ में कुछ नहीं आता |

सनातन धर्म:

अब सनातन धर्म क्या है यह सबको परेशान कर रहा है | मैं सनातन धर्म की बात करता हूँ तो हिन्दू समझते हैं कि मैं लोगों को कायर बना रहा हूँ | क्योंकि मैं अनावश्यक हिंसा से परहेज बताता हूँ | जबकि हिन्दू मानते हैं कि जैसे मुसलमान मार-काट मचाते हैं, वैसे ही हमें भी करना चाहिए तभी हम सच्चे हिन्दू कहलायेंगे | कल किसी से चर्चा हो रही थी और मेरे इस वक्तव्य से उन्हें आपत्ति थी कि सनातन धर्म अनश्वर है, आदि है अनंत है उसे कोई मिटा नहीं सकता | यानि सनातन धर्म ही एकमात्र धर्म है जो कभी भी खतरे में नहीं पड़ता | उनका कहना था कि पाकिस्तान में सनातन धर्म मिट गया, बांग्लादेश में सनातन धर्म मिट गया | कहना था कि सनातन धर्म ही खतरे में है, बाकी सभी फलते फूलते जा रहे हैं |

मेरा मानना है कि सनातन धर्म खतरे में है, मानने वाले वास्तव में सनातन धर्म से ही अपरिचित नहीं | वे किताबी धर्म को सनातन धर्म मान रहे हैं | खतरे में केवल वही धर्म होगा, जो मानव निर्मित होगा, ईश्वर निर्मित धर्म भला कैसे खतरे में आ सकता है ?

फिर सनातन धर्म कोई मानवों पर टिका धर्म नहीं है जैसे कि मजहब, या संविधान | मानव रहें न रहें, सनातन धर्म रहेगा क्योंकि वह है ही सनातन | पाकिस्तान में मिटे तो हिन्दू मिटे, बांग्लादेश में मिटे तो हिन्दू मिटे, सनातन धर्म तो आज भी है वहाँ | यदि एक भी पशु-पक्षी जीवित है, यदि एक भी जैविक कोशिका जीवित है, तो सनातन धर्म जीवित है जीवन रूप में | वरना सनातन धर्म पर टिका यह ब्रह्माण्ड तो है ही | ये सब अपनी अपनी धुरी पर, अपने अपने पथों पर नियमित गति कर रहे हैं यह प्रमाण है कि सनातन धर्म सर्वस्व है | यह केवल मानवों के लिए नहीं है, सम्पूर्ण विश्व के लिए है |

आइये थोड़ी सहजता से समझाता हूँ

बाकी सभी किताबी धर्मों को समझने के लिए आपको मोटे मोटे ग्रन्थ पढ़ने पड़ते हैं | फिर उन्हें समझने के लिए किसी विद्वान को खोजना पड़ता है | हर विद्वान् अलग अलग व्याख्याएं करते है और दिमाग का दही हो जाता है | लेकिन सनातन धर्म बहुत ही सहज है क्योंकि ये किताबों पर आधारित नहीं है | आप किसी भी जीव जंतु की जीवन शैली देखकर समझ जायेंगे सनातन धर्म |

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सनातन धर्म के १० मुख्य सूत्र:

१- आत्मरक्षा व युद्ध कौशल में निपुण होना

२- जीवनोपयोगी शिक्षा ग्रहण करना |

३- अपने परिवार की रक्षा व उनके भोजन की व्यवस्था करना

४- अधिक से अधिक समय अपने परिवार के लिए रखना और अनावश्यक वस्तुओं का भण्डारण न करना |

५- कोई भी ऐसा कार्य न करना, जिससे किसी को कष्ट पहुँचे या किसी को हानि हो किसी भी प्रकार की |

६- जिस भी स्थान या देश में रहते हों, उसके प्रति निष्टावान होना और शत्रुओं से सुरक्षा करना |

७- किसी के प्राण बचाने के लिए अपने प्राणों की भी आहुति देनी पड़े तो संकोच न करना |

८- जो कुछ भी मिले, मिल बाँट कर खाना ताकि कोई भूखा न रह जाये

९- अनावश्यक हिंसा से परहेज करना और दूसरों की संपत्ति पर कुदृष्टि न रखना |

१०- किसी के साथ विश्वासघात न करना और न ही झूठे आश्वासन देना |

उपरोक्त सूत्र आपको लगभग सभी मजहबों के धार्मिक ग्रंथों में मिल जायेंगे | यहाँ तक कि आसमानी किताबों में भी मिल जायेंगे | लेकिन इन दस जीवन सूत्र को समझने के लिए बाकी सभी मजहबों में ज़िन्दगी भर धार्मिक ग्रन्थ पढ़ना पड़ता है, रोज माथे से लगाना पड़ता है, उन्हें चूमना पड़ता है या फिर अगरबत्ती दिखाकर आरती उतारनी पड़ती है, दूसरे मजहबों की निंदा करनी होती है, दूसरे को मिटा देने के सपने देखने होते......उफ्फ....कितना कुछ करना पड़ता है धर्म को समझने के लिए | लेकिन सनातन धर्म को समझने के लिए कोई किताब की भी आवश्यकता नहीं पड़ती | नीचे कुछ विडियो दे रहा हूँ और आपको विश्वास दिलाता हूँ कि इस विडियो में जितने भी पात्र हैं, उन्होंने कोई भी धार्मिक ग्रन्थ नहीं पढ़े हैं | लेकिन वे सभी सनातन धर्मी हैं और वह भी अपने आचरण से | ये नहीं कहेंगे कि यदि सनातन धर्म को जानना है तो हमारी धार्मिक ग्रंथो को पढ़ लो | क्योंकि सनातन धर्म इन्हें देखकर कोई भी सीख व समझ सकता है |

यदि आपने सभी विडियो देख लिए हैं तो सनातन धर्म समझ में आ गया होगा | और यह भी समझ में आ गया होगा कि सनातन धर्म सनातन ही है और समस्त जीव जगत इसका अनुसरण करता है बिना कोई शास्त्र पढ़े, मंदिर वहीँ बनायेंगे का नारा लगाए, मंदिर मस्जिदों के नाम पर कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ते हुई | न ही इन्हें कोई धर्म रक्षक गुंडे-मवालियों की सेना बनानी पड़ती है और न ही धर्म रक्षा के नाम पर कोई उत्पात करना पड़ता है | बहुत ही सहजता से सभी जीव जंतु सनातन धर्म का पालन करते हैं | केवल मानव ही है जो सनातन धर्म से विमुख हो गया और किताबी धर्मों के खो गया | और परिणाम सभी के सामने है | आज भी सनातन धर्म का पालन करते वे आदिवासी देखे जा सकते हैं जो किताबी धार्मिकों की संगत में नहीं आये |

~विशुद्ध चैतन्य

नीच दो लिंक दे रहा हूँ ताकि आप आसमानी किताबी धर्म भी समझ लें और चिन्तन मनन कर सकें कि ये किताबी धर्म किताबों में ही दफन होकर क्यों रह गये |




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