हर विनाशकारी चीज तेजी से ही फैलती है

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आप संघी हैं या मुसंघी, आप हिन्दू हैं या मुस्लिम, आप कांग्रेसी हैं या भाजपाई मेरे लिये सिवाय कूपमंडूक के और कुछ नहीं । क्योंकि आप लोगों की मानसिक स्थिति उस डॉक्टर से अच्छी नहीं है, जिसने कभी मेडिकल की क्लास देखी ही न हो लेकिन बाप दादा डॉक्टर थे, इसीलिये अपने नाम के साथ डॉक्टर लगा लिया ।

आप लोगों की मानसिक स्थित उस मानसिक रोगी से अच्छी नहीं, जो मोर-पंख सर पर लगा मोर बना फिर रहा हो ।

आपके पास अपने अपने दड़बों के दोष देखने की क्षमता ही नहीं है । आपको अपने लोगों के उत्पात, शोषण, अत्याचार, भ्रष्टाचार दिखाई नहीं देते । आप लोगों को अपने चहेतों के घोटाले नहीं दिखाई देते । आप लोगों के पास सिवाय पूवजों के अच्छाइयों के किस्से कहानियों के कुछ है ही नहीं बताने के लिए ।

हिन्दू नेताओं और शासकों की योग्यता तो मात्र इतनी ही बची है, कि सड़कों स्टेशनों के नाम बदलते रहें विकास के नाम पर । नया और बेहतर कुछ सोचने या बनाने की क्षमता और योग्यता ही नहीं ।

मुस्लिमों के हालात तो और खराब हैं । इनका इस्लाम तो किताबों में दफन होकर रह गया | ये इस्लाम को अपने कर्मों और व्यवहार से समझा ही नहीं सकते । एक ही रटा-रटाया डायलॉग सुनने मिलेगा उनसे कि इस्लाम को जानना है तो क़ुरान-हदीस पढ़ लो ।

मुस्लिमों को अगर इस बात का फक्र है कि इस्लाम बहुत तेजी से फैल रहा है, तो आरएसएस भी फैल रहा है, नफरत भी फैल रहा है, भ्रस्टाचार भी फैल रहा है, धोखा घड़ी और बेईमानी भी फैल रहा है, मलेरिया और प्लेग जैसी महामारियाँ भी तेजी से फैलती हैं ।

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यानि हर विनाशकारी चीज तेजी से ही फैलती है और हर लाभदायक जीवनदायक चीजें धीरे धीरे ही फैलती है । आरएसएस इस्लाम की ही तरह नफरत पर आधारित है, इसीलिये तेजी से फैल रहा है ।

और ये महामारियाँ कितनी घातक हैं, ये इराक, सीरिया और अफगानिस्तान के भुक्तभोगियों से बेहतर और कौन जान सकता है ?

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फैलने पर फख्र मत करिए, बुराई हमेशा तेजी से ही फैलती है ।

अंत में एक बात फिर से बता दूं, कि जितने भी मुसलमा गलतफहमी में मुझसे जुड़ गए थे कि मैं केवल हिन्दू और हिंदुत्व के ठेकेदारों के विरुद्ध हूँ, वे मुझे ब्लॉक कर सकते हैं । मैं दुनिया के हर दड़बे के कूपमंडूकों और देशद्रोहियों के विरुद्ध हूँ । मैं हर उन धार्मिकों के विरुद्ध हूँ जो परंपराएं ढोये जा रहें हैं न कि निभा रहे हैं । मैं हर उस राजसत्ता के विरुद्ध हूँ, जो नौटंकीबाजों, जुम्लेबाजों और मसखरों/जोकरों के भरोसे सत्ता सुख भोग रही है ।

मुझे कोई शौक नहीं है आप लोगों से वाहवाही बटोरने का । क्योंकि ये वाहवाहियां मेरे किसी काम की नहीं । आप मेरे या देश के काम के हो सकते हैं, जब आपके लिए मजहबी और राजनैतिक दड़बे और झूठे मक्कार दोगले नेताओं से अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्रहित व नागरिक हित हो जाएगा । जब आप अपने अपने दड़बों से बाहर निकलकर देश की विराटता को देखने और समझने योग्य हो जाओगे । जब आप हिन्दू, मुस्लिम, कांग्रेसी, भाजपाई नहीं होंगे केवल भारतीय हो जायेंगे तब शायद आप मेरे या मेरे देश के काम आ पायें |

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और जब तक इतने योग्य नहीं हो पाते, तब तक किसी भी दड़बे में कैद व्यक्ति की समझ में नहीं आएँगी मेरी बातें । मैं इस दुनिया में कूपमंडूकों को खुश करने नहीं आया हूँ । इसलिए आप मेरे दुश्मन बनना चाहें , शौक से बनें । मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं क्योंकि जब हिंदुत्व के ठेकेदार और कूपमंडूक मेरे दुश्मन बने, तब चिंता नहीं की, जब मेरे अपने ही आश्रम सम्प्रदाय के लोग मेरे विरोधी बने तब चिंता नहीं की, तो इस्लामिक कूपमंडूकों के विरोधी हो जाने से भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा । मैं कोई राजनेता नहीं हूँ कि हर किसी को खुश करता फिरूँ अपने मतलब के लिए ।

मेरा परिचय:

नाम: विशुद्ध चैतन्य

नागरिकता: भारतीय

भाषा: हिन्दी

रिलिजन/मजहब: हिन्दू

धर्म: सनातन

कर्म और वर्ण: ब्राह्मण

जाति: मानव

मान्यताएं: सर्वधर्म समभाव, वसुधैव कुटुम्बकम, वैमनस्यता व भेदभाव से मुक्त जीवन

वाद: राष्ट्रवाद, मानवतावादी,

शिक्षा: अनपढ़, गँवार

विषय: मनोविज्ञान, राजनीती विज्ञान, समाजविज्ञान, खगोलविज्ञान...आदि में से कोई नहीं |

जीवन का उद्देश्य: दडबों में कैद सुप्त समाज को जागृत करना और राष्ट्र व मानवता के हितों के प्रति निष्ठावान बनाना |

~विशुद्ध चैतन्य




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