महान जुमलेबाज सम्राट की उदारता

Print Friendly, PDF & Email



कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है | किसी देश में विश्वभ्रमणकारी महान चक्करभर्ती जुमलेबाज सम्राट राज्य किया करता था | उन्होंने देश के विकास के लिए सड़कों के नाम बदलवाए, जिससे सड़कों के गड्ढे भर गये और सड़कें बिलकुल इम्पोर्टेड जैसी दिखने लगीं | उन्होंने कई स्थलों के नाम स्टेशनों के नाम बदलवाए, जिससे वे बिलकुल पेरिस जैसे दिखने लगे | उन्होंने कई गाँवों, शहरों को गोद लिया और दिलवाया, जिससे वे सभी टोक्यो और क्योटो जैसे दिखने लगे |

वह बहुत ही भला था और देश के हर नागरिकों को अमीर देखना चाहता था | इसीलिए उसने देश के सभी नागरिकों का धन अपने खजाने में जमा करवाकर अपने विश्वस्त व्यापारियों को बाँट दिया | बहुत से व्यापारी अपने हिस्से का खजाना लेकर विदेशों में सेटल हो गये ताकि खजाने को मल्टीप्लाई किया जा सके |

इस तरह से उन्होंने देश के सभी नागरिकों को अमीर कर दिया था | लेकिन फिर भी दो नागरिक गरीबदास और धनीराम छूट गये जो अमीर नहीं हो पाए थे | वे दोनों अपनी गरीबी और भुखमरी से त्रस्त होकर एक दिन विश्वभ्रमणकारी महान चक्करभर्ती जुमलेबाज सम्राट के दरबार पहुँच गये और अपनी दुखभरी कहानी सुनाई | उनका दुःख सुनकर वहाँ उपस्थित सभी दरबारियों के आँखों से चुनावी आँसू (चुनावी मौसम में नेताओं के आँखों से बहने वाले राजनैतिक आंसू) बहने लगे | सम्राट का मन भी द्रवित हो गया और उन्होंने उसी समय निश्चय कर लिया कि इनका उद्धार करना है |
 
उन्होंने गरीब दास का नाम परिवर्तन करके अमीरदास कर दिया | धनीराम की दरिद्रता दूर करने के लिए उसे अपने शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी को २५ करोड़ में गोद दे दिया | सम्राट की इस उदारता से तीनों लोकों में उनकी जयकार होने लगी | देवताओं ने खुद आकाश से उनपर फूल बरसाए और सम्राट को आशीर्वाद दिया कि अनंतकाल तक तुम विश्वभ्रमणकारी महान चक्करभर्ती जुमलेबाज सम्राट के नाम से जाने जाओगे और दुनिया के जितने भी दिमाग से पैदल प्राणी होंगे उनको स्वर्ग या मोक्ष तभी मिलेगा, जब वे तुम्हारी अंधभक्ति करेंगे |
कहते हैं उस दिन के बाद से कभी भी किसीने गरीबदास और धनीराम को दुखी व दरिद्र नहीं देखा |
 
~विशुद्ध चैतन्य



लेख से सम्बंधित अपने विचार अवश्य रखें

रुचिकर लेख  इतिहास: आखिर क्या हुआ कि नष्ट हो गई प्राचीन द्वारिका
Share this post