समाज को स्त्री पुरुष संबंधों से नफरत है

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यौन हिंसा से त्रस्त भारत की स्थिति देखकर, सेक्स के प्रति समाज की क्रूरता देखकर...आज मैं ईश्वर का धन्यवाद् करना चाहता हूँ कि उसने मेरा विवाह ही नहीं होने दिया | उसने स्त्रियों से दूर रखा....इसीलिए मैं उसका आभारी हूँ |

क्योंकि तब मैं अवश्य स्त्रियों के प्रति आकर्षित हुआ करता था, तब मुझे लगता था कि स्त्री के साथ होना सुखकर होता होगा....लेकिन अब स्त्री पुरुष सम्बन्ध ही घृणित व अपराध नजर आने लगा है | ऐसा लगने लगा है कि स्त्री पुरुष सम्बन्ध सुखकर नहीं होता, बल्कि स्त्रियों पर पुरुषों द्वारा अत्याचार ही होता है | अच्छा ही हुआ कि मैं किसी स्त्री पर अत्याचार करने से बच गया | अच्छा ही हुआ कि मेरा विवाह नहीं हुआ |

समाज को स्त्री पुरुष संबंधों से नफरत है, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध सहज स्वाभाविक प्राकृतिक क्रिया नहीं है शायद | और चूँकि ये सम्बन्ध समाज द्वारा घृणित माने गये हैं, इसीलिए स्त्रियों पर अत्याचार करना पुरुषों ने अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ लिया | अपनी काम पिपासा शांत करने के लिए कभी दलित लड़की को अपना शिकार बनाता है तो कभी गैर मजहबी लड़की को | और समाज बहाना खोजता है कि उसे गैर मजहबी लोगों से नफरत थी इसीलिए उसने ऐसा किया | अर्थात स्त्रियों के प्रति अपनी घृणा को प्रदर्शित करने के लिए स्त्रियों का बलात्कार करना सामान्य बात है | आदिकाल से ही ऐसा होता चला रहा है | युद्ध बंदी हो या युद्ध में जीते गये देश या शहर हों...शिकार स्त्रियों, बच्चियों का ही किया जाता है |

तो समाज आज भी स्त्री-पुरुष संबंधों के प्रति सहज नहीं हो पाया और शायद कभी हो भी नहीं पायेगा | मैंने थाईलेंड में देखा है कि वहां को कोई भी स्त्रियों के प्रति कामुकता से भरा हुआ नहीं है | वहां स्त्रियों को देखकर लार टपकाते युवा व बुजुर्ग नहीं नजर आयेंगे | वहा सेक्स एक सामान्य बात है, उन्हें लार टपकाने की अवश्यकत नहीं है क्योंकि वहां का समाज सेक्स के प्रति दमनकारी नहीं है | लेकिन भारतीय समाज सेक्स के विरुद्ध है | भारतीय समाज आज तक सेक्स को सहजता से नहीं स्वीकार पाया है | आज भी स्त्री-पुरुष सम्बन्ध समाज के लिए झूठे अहंकार व मान-मर्यादा का विषय है |

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सचमुच शर्म आने लगी है मुझे ऐसे समाज पर, ऐसे धार्मिकों पर, ऐसे सभ्यों पर | जो युवा ऐसे वातावरण में पल-बढ़ रहे हैं, स्वाभाविक ही है कि वे भी मेरी ही तरह स्त्री-पुरुष संबंधों के प्रति घृणा से भर जायेंगे | स्वाभाविक ही है कि वे भी कल विवाह जैसे संबंधों से भागने लगेंगे | स्वाभाविक ही है कि कल उन्हें भी जापानियों की तरह सेक्स डॉल की आवश्यकता पड़ेगी...क्योंकि सामान्य मानवों से सेक्स करना बहुत ही जोखिम भरा हो चुका है | और समय के साथ नए नए कानून बनेंगे, फिर यह भी तय होगा कि किस लड़की को कितनी देर तक आप देख सकते हैं, किस लड़की से कितनी दूरी बनाई रखनी है.....वगैरह वगैरह....क्योंकि समाज वास्तव में स्त्री पुरुष संबंधों का ही विरोधी है | और ये साधू संतों द्वारा कही गयी बात कि स्त्री नरक का द्वार है...से स्वतः ही सिद्ध हो जाता है |

अपराधियों की आढ़ में स्त्रियों से भी भय का वातावरण बनाया जा रहा है | अपराधियों की आढ़ में स्त्रियों को दुर्भाग्य का कारक बनाया जा रहा है | जल्दी ही वह समय आ जायेगा जब पुरुषों के लिए स्त्रियाँ केवल मुसीबत ही मानी जायेंगी | जल्दी ही वह समय आएगा जब पुरुष स्त्रियों से दूर भागते दिखाई देंगे...क्योंकि कानून की आढ़ लेकर स्त्रियाँ पुरुषों का शोषण करने लगेंगी | और दलील दी जाएगी कि सदियों से पुरुषों ने हमारा शोषण किया, अब हमारी बारी है |

तो बलात्कार जघन्य अपराध है लेकिन स्त्री-पुरुष सम्बन्ध अपराध नहीं है, इस भाव को बनाए रखने का प्रयास भी जारी रहना चाहिए |

~विशुद्ध चैतन्य




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