सेवक, सहयोगी या शूद्र ??

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आंबेडकरवादियों को अक्सर देखता हूँ तंज कसते हुए कि आरक्षण हटाने से पहले हमारी तरह गटर में उतर कर दिखाओ | कोई कहता है हम शूद्रों की वजह से ही तुम्हारा शहर साफ़ रहता है | अब ऐसी बातें करने वालों को न तो शूद्र का कोई ज्ञान है और न ही दलित का हाँ ऐसी बातें करने वाले अवश्य शूद्रों की श्रेणी में आ जाते हैं |

दलित कौन ?

दलित अर्थात वे लोग जिनका दलन हो रहा हो यानि जो दो राजनैतिक या सामाजिक पक्षों की लड़ाई में पिसे जा रहे हों | दलित का दूसरा अर्थ दरिद्र भी होता है | दरिद्र शब्द का उचारण बिगड़कर दलिद्दर हो गया और दलिद्दर से दलित हो गया | अब दरिद्र होना अपराध नहीं है और दरिद्र व्यक्ति यदि सफाई कर्मी का काम चुनता है तो वह गलत कैसे माना जाएगा ? क्या विदेशों में सफाई कर्मी नहीं होते ?

सफाई कर्मी को दलित या शूद्र कहना उचित नहीं

तो सफाई कर्मी को शूद्र नहीं माना जा सकता तब तक, जब तक कि वह स्वेच्छा से उस कार्य को चुनता है | मैंने कई भले घरों के लोगों को देखा है, पार्कों की सफाई करते, अपने आस-पड़ोस की सड़कों की सफाई करते | जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तब हर शनिवार सफाई अभियान चलता था | उसमें हमें गाँव से गोबर लेकर आना होता था, और फिर स्कूल को गोबर से लीपना होता था | फिर स्कूल के आसपास सफाई करनी होती थी, बागवानी करनी होती थी | तो क्या हम शूद्र हो गये ?

ये दो तस्वीरें देखिये विदेशी सफाई कर्मियों यानि आपकी नजर में दलित या शूद्रों की:

अब यह तस्वीर देखिये भारतीय सफाई कर्मी की

सफाई कर्मी तो विदेशों में भी होते हैं, लेकिन वे शूद्र या दलित नहीं कहलाते | केवल भारत में ही सफाई कर्मी को दलित या शूद्र माना जाता है | क्यों ?

क्योंकि न दलित का अर्थ पता है न शूद्र का अर्थ | दलित का अर्थ तो मैंने बता ही दिया था शूद्र का अर्थ भी यदि आप मेरे इसी ब्लॉग में खोजेंगे तो वह भी मिल जायेगा और विस्तार से पढ़ने व समझने के लिए मिलेगा | फिलहाल में संक्षिप्त में बता शूद्र के विषय में समझा देता हूँ |

शूद्रता वह मानसिक अवस्था है, जब व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने, सोचने समझने की योग्यता नहीं रखता | वह निर्णय ले पाने में अक्षम होता है | वह केवल दूसरों के अधीन रहना ही पसंद करता है, दूसरों के आदेश का पालन करना ही पसंद करता है, बिना सही गलत का निर्णय लिए | ऐसे लोग जो विवेकहीन होते हैं, बुद्धिहीन होते हैं वे शूद्र कहलाते हैं | उदाहरण के लिए नेताओं के दुमछल्ले, चाटुकार, भाजपाई आईटीसेल के उत्पाती, सोशल मिडिया में अपने अपने नेताओं के झूठी तारीफ करते चाटुकार | शूद्र होते हैं वे लोग जो धर्म व जाति के नाम पर उत्पात मचाते हैं, नफरत फैलाते हैं, गुंडागर्दी करते हैं | शूद्र होते हैं वे लोग जो डिग्रियाँ बटोरकर भी स्वरोजगार करने में सक्षम नहीं हो पाते और बेरोजगारों की लाइन में खड़े दीखते हैं या फिर भ्रष्ट दुराचारी राजनेताओं की जयकारा लगाते दिखाई देते हैं |

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तो शूद्र वे लोग नहीं जो सफाई करते हैं, गाँव शहरों को साफ़ रखते हैं |

शूद्र हैं वे अधिकारी, मंत्री जो इन शहर की सफाई व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन सफाई कर्मियों को सुविधाएँ नहीं प्रदान करते | शूद्र हैं वे लोग जो इनकी दुर्दशा दिखाकर राजनीती करते हैं, उच्च पदों पर आसीन होते हैं लेकिन केवल अपनी तिजोरी भरने में लगे रहते हैं | शूद्र है वह समाज जो इन सफाई कर्मियों के हितों के लिए आवाज नहीं उठाता, जो प्रशासनिक अधिकारीयों व मंत्रियों पर दबाव नहीं बनाता इनके लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए | पैसों की कोई कमी नहीं है भारत में | यदि पैसों की कमी होती भारत में तो भाजपा साल भर में दुनिया की सबसे अमीर पार्टी नहीं बन जाती | यदि कमी होती पैसों की भारत में तो हजारों करोड़ों रूपये डकारकर नहीं बैठे होते माल्या, ललित, नीरव जैसे बिजनेसमेन | यदि पैसों की कमी होती भारत में तो आये दिन बड़े बड़े घोटाले नहीं हो रहे होते | यदि पैसों की कमी होती भारत में, तो जुमलेबाज प्रधानमंत्री दुनिया की सैर नहीं कर रहे होते, जनता के खून पसीने की कमाई से | यदि पैसों की कमी होती भारत में तो दस लाख का सूट पांच करोड़ में नीलाम नहीं हो रहा होता | यदि पैसों की कमी होती भारत में तो कोई भी राजनेता बनने के सपने नहीं देखता और न ही राजनेता बनकर पांच साल में कई सौ गुना अधिक संपत्ति का मालिक बन सकता था |

तो पैसों की कमी नहीं है | कमी है तो केवल प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता और मंत्रियों के नीयत की गुणवत्ता में |

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दलित, शूद्र की राजनीति से बाहर निकलें और अपने देश को उन्नत बनाने में सहयोग करें

इन सफाई कर्मियों की दुर्दशा से द्रवित होकर, मेरे एक मित्र ने सीवेज लाइन साफ़ करने की मशीन बनाई है | वे कई अधिकारीयों और मंत्रियों से भी मिले, लेकिन सभी मोटी कमिशन के लालच में बैठे हुए हैं | बस आश्वासन देकर बात टालते रहते हैं |

अतः जो भी कोई ऐसा नेता या प्रशासनिक अधिकारी इन सफाई कर्मियों को स्वाभिमान व सम्मान पूर्वक शहर को स्वच्छ रखने में योगदान देते हुए देखना चाहता है, उनसे आग्रह है कि वे इस ब्लॉग के अंत में दिए विडियो को अवश्य देखें और सहयोग करें मेरे मित्र की, ताकि वे बहुत ही कम कीमत में ऐसी मशीनें भारत में ही बना पायें और इन सफाई कर्मियों को नारकीय जीवन से मुक्त करवाने में सहयोग कर पायें | वे आज विदेश में नौकरी कर रहे हैं, प्रयास करें कि ऐसे योग्य आविष्कारक भारत में ही रहकर भारत की सेवा कर पायें |

दलित शूद्र वाली राजनीती से इनका कोई भला नहीं होने वाला, भला होगा जब इनको भी सम्मान पूर्वक शहर को स्वच्छ रखने में हम सभी मिलकर सहयोग करें |

मित्र ने जो मशीन बनायी है, वैसी ही मशीन यदि विदेश से खरीदते हैं तो वह तीन-चार करोड़ से कम की नहीं पड़ती | जबकि वैसी ही मशीन हम भारत में केवल कुछ ही लाख रूपये में उपलब्ध करवा सकते हैं | तो सहयोग के लिए आगे आयें, और इन श्रमिकों को सम्मानपूर्वक जीने दें |

यदि आप वास्तव में चाहते हैं कि सफाई कर्मियों को उच्च स्तर की सुविधाएँ मिलें, अच्छे मशीन मिलें तो नेताओं और मंत्रियों पर दबाव बनायें कि वे इनके हितों पर ध्यान दें | इनके नाम पर राजनीति करने से इनका कोई भला नहीं होने वाला और न ही इन्हें आरक्षण दिलवाने से कोई भला होगा | भला होगा जब इनके काम करने के लिए उचित संसाधन उपलब्ध करवाएं |

भारत में ऐसे कई इंजीनयर व वैज्ञानिक हैं जो इनके हितों को ध्यान में रखकर काम करना चाहते हैं | लेकिन भारत सरकार का व्यवहार उनके प्रति उदासीन है | क्योंकि अधिकारीयों, मंत्रियों को इनसे अधिक कमिशन मिलने की सम्भावना नहीं दिखाई देती | ऐसे योग्य इंजीनयरों को अपनी आजीविका के लिए विदेशों में नौकरी करनी पड़ रही है | यदि हम भारतीय इनका सहयोग करें तो जो मशीनें करोड़ों रूपये में विदेशों से खरीदी जाती है, वही मशीन हम भारत में कुछ लाख में ही उपलब्ध करवा सकते हैं |

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साहेब इंजीनियरिंग, ऐलनाबाद द्वारा निर्मित मशीन न केवल गटर साफ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बल्कि किसी भी सफाई कर्मी को गटर में उतरने की विवशता से मुक्त करती है | विस्तार से नीचे पढ़ सकते हैं और विडियो भी देख सकते हैं |

~विशुद्ध चैतन्य

नोट: वेतन पर आश्रित नौकर या पारिश्रमिक लेकर श्रम करने वाले को सेवक नहीं कहा जा सकता | क्योंकि कीमत लेकर की गयी सेवा व्यापार है सेवा नहीं | कीमत लेकर की गयी सहायता भी सहायता नहीं व्यापार है क्योंकि सहायता कीमत लेकर नहीं की जाती | लेकिन कोई सेवा कर रहा है, सहायता कर रहा है बिना आपसे कोई अपेक्षा किये स्नेह या सम्मान वश, तो उसके प्रति आपका भी दायित्व होता है कि आप उसका ध्यान रखें, उसे सम्मान दें, उसे स्नेह दें | सेवा व सहयोग सनातन धर्म का मूल है इसीलिए निःस्वार्थ सेवक या सहयोगी सम्मानीय हैं |

 

"आप सभी मित्रों को विदित करते हुये बड़ी प्रशन्नता अनुभव कर रहा हूँ कि 'साहेब जी "की कृपा से हमने सीवरेज की सफाई करने हेतू, कम लागत में देशीय उपकरणों के प्रयोग से रीसाइक्लिंग यूनिट का निर्माण एवं सफलता पूर्वक परिक्षण किया है।

इस प्रकार की यह भारत की पहली मशीन है जिसमे ऑयल कम्पनियों में प्रयोग होने वाले शैल-शेकर टेक्निक का प्रयोग किया गया है जो पानी व इसमे मिली सिल्ट को अलग कर देता है और सीवरेज के पानी को लगातार प्रयोग में लाया जाता है।तथा इसकी बेहद कम क़ीमत व ट्रेक्टर -ट्राली पर बनी होने के कारण बहुत उपयोगी है।

यह मशीन Zero- spill तकनीक आधारित है जिसमे हेल्थ ,सेफ्टी एवम एन्विरोमेंट (HSE) के मानकों को पूरा करती है और मानवो के परिश्रम को कम करके उनकी कुशलता बढ़ाती है।

अतः आपके स्नेहाशीष से इस मुहिम को सार्थक व उपयोगी बनाने हेतू,आपकी शुभकामनाओ की अपेक्षा रखता हूँ, आपके मार्गदर्शन के लिये अनुगृहीत हूँ,कृपया मार्गदर्शन अवश्य करियेगा!!!

निवेदन-
भगवत दयाल
साहेब इंजीनियरिंग, ऐलनाबाद।
समीप सन्त कबीर वृद्ध आश्रम, हनुमानगढ़ रोड।
जिला सिरसा,हरियाणा, भारत।

 




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