वास्तु शास्त्र का महत्व

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ज्योतिष शास्त्र हो या वास्तु शास्त्र, दोनों ही अपनी अपनी जगह बहुत ही महत्वपूर्ण हैं | यह और बात है कि आज इन विषयों के विद्वान दुर्लभ हैं क्योंकि ये मात्र गणित नहीं हैं | ये विषय वैश्यों का विषय नहीं है और न ही उन्हें इन विषयों को अपना प्रोफेशन बनाना चाहिए | लेकिन आज ये प्रोफेशन केवल वैश्य ही अपना रहे हैं क्योंकि वास्तविक ब्राहमण अब लुप्त होने के कागार पर हैं |

अब तो वैश्य ही ब्राह्मण बने घूमते हैं, वैश्य ही मंदिरों, तीर्थों में पुजारी बने बैठे हैं, अब तो वैश्य ही ज्योतिषीय फलादेश करते हैं |

ज्योतिष व वास्तुशास्त्र जैसे विषय उन्हें ही अपनाना चाहिए जो भौतिक व अध्यात्मिक जगत में समन्यव रखने में सक्षम हों | जिन्हें ध्यान, तप आदि का अनुभव हो |

मेरी रूचि इन विषयों में बहुत ही कम उम्र में हो गयी थी और -१३-१४ वर्ष की आयु तक तो न्यूमरोलॉजी यानि अंकज्योतिष की अच्छी समझ हो चुकी थी | आगे मैंने वास्तु शास्त्र का अध्ययन किया तो पाया कि वह बहुत ही तर्कसंगत है | मैंने कई लोगों की वास्तुदोष सम्बन्धी समस्याओं का समाधान भी किया |

जब मैं इस आश्रम में आया था तो गेट के सामने ही बिजली का ट्रांसफार्मर लगा दिखा | मैंने आते ही कहा कि यह तो गलत है, इसे शिफ्ट करवाना चाहिए | लेकिन सभी ने मेरी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया क्योंकि यहाँ बड़े बड़े विद्वान आकर जा चुके हैं और किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई | केवल मैं ही आकर ऐसी बातें कर रहा था और फिर इनकी नजर में मैं बच्चा ही था |

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मैंने पाया कि आश्रम में अधिकांश लोग बीमार ही रहते हैं और आर्थिक आभाव में यह आश्रम हमेशा रहा | कोई मंदिर में न दान देता है और नहीं कोई चढ़ावा चढ़ाता है | आश्रम प्रमुख उन्हें ही चुना जाता है, जिनके शिष्य आर्थिक रूप से समृद्ध हों, इसलिए आश्रम प्रमुख सुखी रहते हैं, घूमते फिरते हैं | लेकिन आश्रम के उत्थान के लिए कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाते | मैंने पाया कि आश्रम का चार्ज जिसके भी हाथ में आया, वह अपना इलाज करवाने बाहर चला जाता था, लेकिन आश्रम का ही धन आश्रम के उत्थान में खर्च नहीं कर पाता था | आश्रम बरसों से कोर्ट कचहरी में उलझा हुआ है और भूमाफिया आश्रम की बहुत जमीन हथिया चुके हैं | आश्रम में आने वालों के मन में आश्रम या संन्यासियों के प्रति कोई आदरभाव नहीं होता, उनके लिए केवल यह पिकनिक स्पॉट होता है और छुट्टी मनाकर चले जाते हैं भक्ति व श्रद्धा के नाम पर |

वास्तुशास्त्र कहता है, "यदि मकान के सामने बिजली का खम्भा या बड़ा इलेक्ट्रानिक खम्भा, ट्रांसफार्मर हो तो, यह स्थिति शुभ नहीं मानी गयी है। ऐसे घर में बीमारी प्रवेश कर जाती एंव घर में अग्निकाण्ड, झगड़ा या कोर्ट केश का भय बना रहता है।

उपाय- घर के मुख्यद्वार पर अष्टकोणीय दर्पण इस प्रकार लगायें कि खम्भे का नाकारात्मक प्रतिबिम्ब परिवर्तित होकर वापस लौट जायें।"

मैंने फिर एक पाकुआ/बागुआ मिरर लगवाया पिछले ही वर्ष | उसका परिणाम यह हुआ कि आश्रम का धन अब आश्रम में ही खर्च होने लगा और आश्रम में बहुत तेजी से विकास कार्य आरम्भ हुआ है | हालाँकि प्रमुख का मानना है कि वे करवा रहे है जो कुछ करवा रहे हैं और सही भी है, लेकिन ये कार्य पिछले बीस वर्षों में नहीं करवा पाए | आश्रम खंडहर हुआ चला जा रहा था और वे अपने निजी आश्रम को संवारने, घुमने फिरने में व्यस्त थे |

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इस बीच कई बार मैंने कहा कि आश्रम के सामने से बिजली का ट्रांसफार्मर हटवाइये.....आज जाकर ट्रांसफार्मर शिफ्ट करवाया जा रहा है | और मैं जानता हूँ कि इसके परिवर्तन के साथ ही आश्रम में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन होंगे | क्योंकि जहाँ भी आर्थिक लाभ बढ़ता है, वहाँ धूर्त मक्कारों का जमावड़ा होने लगता है | हो सकता है कि ऐसी स्थिति में मुझे यह आश्रम ही छोड़ना पड़े क्योंकि मैं लोभी, मक्कारों के साथ नहीं रह सकता |

खैर...जो भी हो आश्रम का उत्थान होना चाहिए यही मेरा उद्देश्य था और इसी कार्य के लिए ईश्वर मुझे यहाँ लाया था | मेरा काम बहुत हद तक पूरा हो गया ऐसा मैं मानता हूँ | लेकिन यदि ईश्वर को ऐसा लगता है कि मुझे अभी कुछ समय और रुकना चाहिए, तो मुझे बहुत कुछ सहन करते हुए यहाँ रुकना पड़ेगा |

~विशुद्ध चैतन्य




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