कयामत के दिन तुरही बजेगी और मुर्दा जी उठेगा




कयामत के दिन तुरही बजेगी और मुर्दा जी उठेगा और फिर खुदा न्याय करेगा |यानि वह दिन होगा Day of Justice का | तब तक दुनिया में जस्टिस केवल उन्हीं को मिलेगा जो शैतानों की गुलामी या चापलूसी करते हैं |

जब भी कभी उस उपरी अदालत की कल्पना करता हूँ, जहाँ जज बैठकर न्याय करते हैं, स्वर्ग नरक आदि पर निर्णय देते हैं…तो मुझे बिलकुल वैसा ही दृश्य नजर आता है जैसे फिल्म-फेस्टिवल पर देखने को मिलता है | हर कोई सजा धजा वहां पहुँचा होता है, हीरो भी होता है हिरोइन भी होती है, विलेन भी होता है और फ़िल्मी गुंडे-बदमाश बलात्कारी, हत्यारे, षड्यंत्रकारी…सभी उपस्थिति होते हैं | फिल्म का मास्टर माइंड यानि प्रोड्यूसर डायरेक्टर, स्क्रिप्टरायटर……हर कोई वहां उपस्थित होते हैं | इनमें से कई इतने बेहतरीन विलेन होते हैं कि परदे पर उनको देखकर ही गुस्सा आने लगता है..लेकिन फिर भी हर बार हम चाहते हैं कि वही विलेन के रूप में आये |

फिल्म फेस्टिवल में जजों के साथ सभी आर्टिस्ट भी अपनी ही अदाकारी दोबारा देखते हैं | फिर वहां बेस्ट एक्टर, विलेन आदि का एवार्ड वितरण होता है | हीरो भी जनता को धन्यवाद देता है और विलेन भी धन्यवाद् देता है और साथ ही सभी से आशा करता है कि इसी प्रकार हमें प्रेम करते रहें और हमारी फ़िल्में देखते रहें |

शायद यह दुनिया भी एक फिल्म ही है और इसीलिए हमारे विद्वानों ने इस माया कहा था | सही गलत जैसा कुछ नहीं होता, बस जो भी जो कुछ कर रहा है, पूरी ईमानदारी से कर रहा है वह सही है और ईश्वर स्वयं उसकी सहायता वैसे ही करता है जैसे निर्माता निर्देशक विलेन और हीरो की सहायता करता है |

कहीं पढ़ा कि किसी मस्जिद में दो सौ से अधिक लोगों की हत्या कर दी गयी | तो स्वाभाविक है कि उनकी हत्या किसी नास्तिक ने तो की नहीं होगी, जिसने भी की होगी उसका भी कोई न कोई खुदा तो होगा ही | वह भी अपने खुदा से आशीर्वाद लेकर गया होगा कि उस उसके अभियान में सफलता प्रदान करें | और जो उस मस्जिद में प्रार्थना कर रहे थे, वे भी खुदा की ही शरण में थे, लेकिन खुदा ने उनकी सहायता करने की बजाय हत्यारे की सहायता की | इसका अर्थ तो यही निकलता है कि खुदा तो अपने शरण में आये लोगों की भी सहायता करने में असमर्थ है | क्योंकि हत्या नहीं होगी, लूटपाट, अश्लीलता नहीं रहेगी किसी फिल्म में, तो वह फिल्म फ्लॉप हो जाती है | और शायद खुदा भी अपनी फ़िल्में फ्लॉप नहीं करवाना चाहता |

~विशुद्ध चैतन्य

केवल लेख से सम्बन्धित टिपण्णी करें

998total visits,8visits today