क्या आप धार्मिक हैं ?

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धर्म निभाते समय किसी पर एहसान करने का भाव नहीं होता और न ही उसे करने के बाद किसी प्रकार की थकान, शिकायत या ग्लानी का भाव होता है | जबकि कर्त्तव्य वह होता है, जिसमें बाध्यता है, विवशता है, दबाव है | कर्त्तव्य निभाते समय आपको अपनी भावनाओं, इच्छाओं, दुख, पीड़ा को भी मारना पड़े तो मारना पड़ेगा Continue reading क्या आप धार्मिक हैं ?

धूर्त, मक्कार, पाखंडियों का एक और नया पाखंड ‘राष्ट्र रक्षा महायज्ञ’

Rashtra-Raksha-mahayagya

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जब नोटबंदी से लोग त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे थे, जब पेट्रोल डीजल के दाम बेलगाम बढ़ रहे हैं, जब महँगाई बेतहाशा बढ़ रही है, तब किसी भी राज्य के राज्याधिकारी ने इन्हें रोकने के लिए कोई यज्ञ नहीं करवाया…..क्योंकि सभी जानते हैं कि यज्ञों से ये सब नहीं रोके जा सकते | Continue reading धूर्त, मक्कार, पाखंडियों का एक और नया पाखंड ‘राष्ट्र रक्षा महायज्ञ’

दान, सेवा, सहायता व धार्मिकता का ढोंग और विकास की अंधी दौड़

vikas

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आज हर पत्रकार भयभीत है क्योकि वह गुलाम हो चुका है और गुलाम को सच कहने का अधिकार नहीं होता | आज हर नौकरीपेशा अपना मुँह बंद किये अपने बीवी बच्चे पाल रहा है क्योंकि उसे अधिकार नहीं है सच कहने का | यदि उसने सच कहा तो उसकी नौकरी चली जायेगी और फूटपाथ पर पहुँच जाएगा वह सपरिवार | Continue reading दान, सेवा, सहायता व धार्मिकता का ढोंग और विकास की अंधी दौड़

त्याग और संन्यास

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इतना सा रहस्य जिस दिन समझ में आ जाये, समझ लो ब्रह्मत्व को प्राप्त कर लिया, उसी दिन समझ लो कि संन्यास सिद्ध हो गया |

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