भीड़ से निपटता गगनदीप सिंह

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आज जहां भारत साम्प्रदायिकता की गर्त में डूबता जा रहा है वहां गगनदीप जैसे लोग उम्मीद जगाते हैं कि धर्म के नाम पर देश को तोड़ना संभव नहीं है. लोग किसी धर्म विशेष का होने से पहले इंसान हैं. उनमें आज भी मानवता बची हुई है. वो बगैर धर्म और जाति देखे , हर उस इंसान के पक्ष में खड़े होते हैं जिनके साथ गलत हो रहा होता है.

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Ajay Walia & Gafoor Chacha

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मेरा दिमाग फटने वाली हालत में था कि भगवान तुम कहाँ हो? जिसने 2 दिन पहले अपना जवान बच्चा खोया वो आज परिवार का पेट भरने की मजबूरी में कौनसे मन से दिहाड़ी कर रहा होगा….

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अपने मन से यह भ्रम निकाल दीजिये कि कांग्रेस अच्छी है कि भाजपा अच्छी है कि सपा अच्छा है कि बसपा अच्छा है…सभी राजनैतिक पार्टियाँ एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं | बाहर से सब अलग अलग, लेकिन भीतर से सब एक ही हैं

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हिन्दुओं के साथ सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि इतने सारे शास्त्र हैं कि उन्हें पढ़ते पढ़ते उम्र गुजर जाती है और समझ में कुछ नहीं आता | इसीलिए शास्त्रों के ज्ञाता आपको खूब मिल जायेंगे लेकिन वे मात्र रट्टू तोते ही होंगे

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