यही है वह सत्य जिसे जानने के बाद

बरसों भटकने के बाद, दुनिया भर की ठोकरें खाने के बाद जो उत्तर मुझे मेरी ही आत्मा ने दिया यानि भीतर से ही जो उत्तर मिला वह यह कि अनाचार, अत्याचार, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, आदि जितने भी आचार हैं, वे सनातन हैं | बिलकुल वैसे ही जैसे रात, अँधेरा

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क्यों कोई समझाने पर भी नहीं समझता ?

कोई व्यक्ति लाख समझाने पर भी नहीं समझ पाता, जबकि कोई व्यक्ति स्वतः ही बुद्ध हो जाता है | कोई व्यक्ति जीवन भर दूसरों की जय जयकार करने में, दूसरों की नकल करने में जीवन व्यतीत कर देता है अपनी बुद्धि विवेक का प्रयोग कभी नहीं करता | जबकि कोई बिना किसी की नकल किये स्वयं ही आदर्श व प्रेरणा बन जाता है समाज के लिए |

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जिसने सत्य को जाना वह मौन हो गया

बरसों भटकने के बाद, दुनिया भर की ठोकरें खाने के बाद जो उत्तर मुझे मेरी ही आत्मा ने दिया यानि भीतर से ही जो उत्तर मिला वह यह कि अनाचार, अत्याचार, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, आदि जितने भी आचार हैं, वे सनातन हैं | बिलकुल वैसे ही जैसे रात और अँधेरा

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साम्प्रदायिक वैमनस्यता की अग्नि में स्वाहा होने को तत्पर भारत

भारतीय आज साम्प्रदायिक वैमनस्यता के बारूदी ढेर पर ही बैठे हुए हैं और ऊपर से न केवल बीड़ी सुलगा रखी है, बल्कि बाँट भी रहे हैं | यानि अपनी ही कब्र खुद ही बनाए बैठे हैं और चिता भी अपनी खुद ही जलाने की तैयारी कर रहे हैं | हिन्दुओं को भड़काया जा रहा है मुस्लिमों के विरुद्ध और मुस्लिमों को भड़काया जा रहा है हिन्दुओं के विरुद्ध

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गुड़िया

… और मेरे पापा कहते हैं कि मेरी मम्मी भी जल्दी-ही भगवान से मिलने जाने वाली हैं| तो, मैंने सोचा कि
क्यों ना वो इस गुड़िया को अपने साथ ले जाकर, मेरी बहन को दे दें…

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